
Shardiya Navratri 2025: दुर्गा पूजा 2025 की शुरुआत 28 सितंबर, 2025 (रविवार) को होगी और इसका समापन 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को विजयादशमी के दिन होगा। यह त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
मुख्य तिथियां और पूजा का महत्व (Shardiya Navratri 2025)
– महालया (21 सितंबर, 2025): महालया के दिन देवी दुर्गा का आह्वान किया जाता है। यह दिन उनके पृथ्वी पर आगमन का प्रतीक है और इसे पूजा की शुरुआत माना जाता है।
– षष्ठी (28 सितंबर, 2025): यह दिन दुर्गा पूजा की औपचारिक शुरुआत का होता है। देवी दुर्गा की मूर्ति का अनावरण और पूजा का शुभारंभ होता है।
– सप्तमी (29 सितंबर, 2025): सप्तमी के दिन नवपत्रिका पूजा की जाती है, जिसमें नौ पत्तियों को देवी के प्रतीक रूप में पूजा जाता है।
– अष्टमी (30 सितंबर, 2025): महाष्टमी पूजा सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन दुर्गा अष्टमी व्रत और संधि पूजा होती है।
– नवमी (1 अक्टूबर, 2025): महानवमी के दिन देवी दुर्गा का बलिदान स्वरूप पूजा जाता है।
– दशमी (2 अक्टूबर, 2025): विजयादशमी के दिन दुर्गा विसर्जन होता है। इस दिन देवी को विदाई दी जाती है और सिंदूर खेला का आयोजन होता है।
शुभ मुहूर्त
– मूर्ति स्थापना (28 सितंबर): सुबह *06:08 से 10:30 बजे* तक।
– संधि पूजा (30 सितंबर): रात *07:36 से 08:24 बजे* तक।
दुर्गा पूजा का महत्व
दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह समाज और संस्कृति का उत्सव भी है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और पूरे भारत में भव्यता से मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, और झारखंड में इसकी खास धूम रहती है। पूजा पंडालों में देवी दुर्गा की भव्य मूर्तियां स्थापित की जाती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
यह त्योहार न केवल धार्मिक भावनाओं को मजबूत करता है, बल्कि लोगों को एकजुट करता है। देवी दुर्गा की पूजा के साथ-साथ यह उत्सव सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र बनता है। दुर्गा पूजा के दौरान लोग नए कपड़े पहनते हैं, पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं और उत्सव में भाग लेते हैं।
दुर्गा पूजा का यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में कठिनाइयों के बावजूद अच्छाई की जीत हमेशा सुनिश्चित होती है।
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